कोरोना वायरस : एक घातक महामारी

कोरोना एक ऐसा वायरस है जिसकी बनावट काँटेदार है और उसकी वाह्य परत प्रोटीन से बनी है । उसके चिकनेपन को मिटाने के लिए ही साबुन का देर तक प्रयोग करके हाथ धोने का निर्देश दिया गया । यह इंसान में बाल की मोटाई से 900गुना पतला है जो इंसान के सम्पर्क में आने से पहले मृत प्राय रहता है लेकिन सम्पर्क में आते ही आँख ,नाक ,मुँह द्वारा शरीर मे प्रवेश कर काँटेदार बनावट के कारण शरीर के भीतर घाव करके चिपक जाता है जहाँ यह मानव सैल को खा कर पहले नाक में ,गले मे अपना असर जमा कर फेफड़े ,गुर्दे व जिगर को संक्रमित कर खून में मिल जाता है जहाँ इसका नष्ट होना असम्भव है । इससे उतपन्न बीमारी को COVID-19 कहते है । यह पूरे शरीर को चुपचाप संक्रमित करता है और लक्षण उजागर होने पर इतनी जल्दी बढ़ता की चार से सात दिन में ही मृत्यु हो जाती है । कोरोना बसन्त व सर्दी ऋतु में अधिक पनपता है । कोरोना के प्रकार ...... कोरोना सात प्रकार का पाया जाता है -- 1--HCOV-229-E-- यह चमगादड़ और इंसान को संक्रमित करता है जो सिंगिल-स्ट्रॉन्डेड RNA वायरस है और साँस के माध्यम से शरीर मे प्रवेश करता है जिससे खासी ,जुकाम ,बुखार व साँस लेने में कठिनाई होती है । 2--HCOU-NAL-63--- यह एक अल्फा वायरस हैं।इसकी पहचान नीदरलैंड में एक बीमार बच्चे से हुई ।यह भी साँस द्वारा शरीर मे प्रवेश करता है । 3--HCOU-OC43-- यह भी साँस द्वारा शरीर मे प्रवेश कर फेफड़े व साँस की नली को संक्रमित करता है ।बुजुर्ग व कमजोर इम्युनिटी वाले लोग जल्दी शिकार बन जाते है । 4--HCOU-HKU 1-- इसकी पहचान हाँगकाँग के एक 71 वर्षीय व्यक्ति में की गई।इसमें साँस लेने में बहुत कठिनाई होती है और डबल निमोनिया के लक्षण दिखाई देते है । 5--SARS -- (सीवियर-एक्यूट-रेस्पिरेटरी-सिंड्रोम) यह कोरोना वायरस का पूर्वज है जो 2003 में चीन में पाया गया । यह चमगादड़ों से इंसान में आया और चीन व हांगकांग में 650लोगो की मृत्यु हुई ।इसका पुराना नाम -सीवियर -एक्यूट -रेस्पिरेटरी -सिन्द्रोंम है । 6-- MARS-COU-- ,इसे सऊदी अरब में खोजा गया । यह भी कोरोना का पूर्वज है ।यह ऊँटों से इंसानों में आया ।इसका पूरा नाम -- मिडिल -एशिया -"रेस्पिरेटरी-सिंड्रोम वायरस है ।इससे 800 लोगो की मौत हुई थी । 7- COVID-- 19 इसे नोवल कोरोना वायरस भी कहते हैं । इसे चीन में 2019 में खोजा गया । यह ज्यादा नमी में पनपता है । डॉक्टर मारिया के अनुसार यह एयर बॉर्न भी हो सकता है । इसके लक्षण सार्स और मार्स से बहुत मिलते जुलते हैं ।इसकी संरचना चमगादड़ो में पाए जाने वाले वायरस सार्स से बहुत मिलती है जो सबसे अधिक घातक वायरस है । इसके संक्रमित होने के 14 दिन तक कोई लक्षण नही दिखाई देता । CDC की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस के पूर्वजों का समूह का समूह है जो जानवरों में पाया जाता है । इसे जूनोटिक भी कहा जाता है । यह छींक या खाँसी के माध्यम से सबसे अधिक फैलता है। नाक के स्राव की कुछ बूंदे किसी पर पडने पर 15 सेकेंड में हो व्यक्ति कोरोना की चपेट में आ जाता है और 48 घण्टो में अपना असर दिखा देता है । इस दौरान जो भी व्यक्ति सम्पर्क में आता है वह COVID-19का शिकार हो जाता है । एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति से संक्रमित होने पर एक हफ्ते से भी कम समय लगता है और 14 दिन तक कोई लक्षण नही दिखाई देते । भारत के लिए यह कोई नया नाम नही है । यू० पी०बोर्ड में जंतुविज्ञान पर लिखी रमेश गुप्ता की पुस्तक --आधुनिक जंतु विज्ञान में इस वायरस का जिक्र है जो इंटर के छात्रों को पढ़ाई जा रही है । यह पुस्तक 2001 में पाठ्यक्रम में शामिल की गई थी । एन० सी०,वैदिक इंटर कॉलेज के प्रवक्ता श्री के० पी० सिंह के अनुसार यह वायरस रहिना-वायरस की प्रजाति का वायरस हैं जो अत्यंत घातक है और अन्य इसी जाती के वायरस की अपेक्षा 10गुना तेजी से फैलता है । इसको अबतक कोई न तो को दवाई बन पायी और न कोई वैक्सीन । यह अक्सर मौसम के बदलाव के समय व सर्दियों में अधिक पनपता है । समाजिक दूरी इसका सबसे बड़ा बचाव है । कोरोना से बचाव -- इसकी अभी तक कोई दवाई या वैक्सीन नही तैयार किया गया । इसलिए बचाव हो सबसे बड़ा उपाय हैं । इससे बचने के लिए हमे कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए -- 1-- जल्दी जल्दी 20 सेकेंड तक साबुन से अच्छी तरह हाथ धोए । 2--मास्क पहन कर रखें । 3--बिना मस्क के खासे या छीके नही । छीकते या खासते समय मास्क न होने पर टिशू पेपर का प्रयोग करे या हाथ मोड़ कर कोहनी में छीके या खासे । टिशू पेपर को तुरंत मोड़ कर कचरे के डिब्बों में डालें । 4--फ्लू जैसे लक्षणोंवाले व्यक्तियों से बचें । 5-मीट या अंडे को अच्छी तरह पका कर खाएं । फल व सब्जी को धो कर ही प्रयोग में लाएं । 6--खेतों में काम आने वाले जानवरो के सुरक्षित हो कर ही सम्पर्क में आये । 7--हाथ न मिलाए । भीड़ से बचें । 8--यात्रा बहुत जरूरी ही तभी करें । 9--फिटकरी, डिटॉल व नमक का पानी मे घोल बना कर साथ मे रखें और 15 मिनट के अंतराल से हाथों पर मले । 10-सामाजिक दूरी बनाए रखे । 11--नकद पैसो का लेनदेन सीमित रखें । 12--रोज नहाए और कपड़े धुले हुए व धूप में सूखे हुए ही पहने । 13--अपनी निजी काम मे आनेवाली चीजे किसी दूसरे को न प्रयोग करने दे और न किसी स्वयं करे । 14--पालतू जानवरों के पंजो ,खुरों को फिनायल से सेनिटाइज करे । 15-घर के फर्श को फिलाइल या नमक से साफ करें । 16--आँख, नाक ,मुँह बार बार न छुए । 17--बाल बाँध। कर रखे । 18--अलग बैड पर सोये । कुछ भ्रंतियाँ जो प्रामाणिक नही है ---- 1--ऐसा कोई प्रमाण नही कि चीनी समान छूने से कोरोना वायरस फैल सकता है । 2--,ऐसा कोई प्रमाण नही कि पालतू जानवरों से कोरोना फैल सकता है । हाँ , कोरोना ग्रस्त व्यक्ति से जनवर संक्रमित हो सकते है । 3--ऐसा कोई प्रमाण नही कि गिलोय ,तुलसी या लौंग के सेवन से या जेब मे रखने से कोरोना वायरस से बचा जा सकता है । 4--ऐसा कोई प्रमाण नही कि गर्मी बढ़ने से कोरोना वायरस खत्म हो जाएगा । 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान में भी कोरोना के रोगी देखे गए है । 5--ऐसा कोई प्रमाण नही कि ज्यादा गर्म पानी मे नहाने से कोरोना वायरस न रहने को संभवाना रहती है । 6--WHO के अनुसार ऐसा कोई प्रमाण नही कि गुनगुने पानी मे नमक डाल कर गलारे करने से कोरोना में राहत मिलती है । 7--ऐसा कोई प्रमाण नही कि लहसुन खाने से कोरोना वायरस खत्म हो जाता है । 8--ऐसा कोई प्रमाण नही कि मांस और अंडा खाने से कोरोना फैलता है या संक्रमण होता है । सुशीला जोशी-विद्योत्मा मुजफ्फरनगर sushilajoshi24@gmail.com

Comments

  1. बहुत ही अधिक रोचक और ज्ञानवर्धक शोध किया हुआ प्रमाणिक तथ्यों पर आधारित लेख , विद्योत्मा जी बधाई एवं शुभकामनाएं, आपकी सशक्त लेखनी इसी प्रकार निरन्तर चलती रहे ......

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