आलेख : रावण : एक आवश्यकता
कार्य से अधिक कारण महत्वपूर्ण है जो पूर्व निश्चित है । हर घटना का कोई न कोई कारण होता है जैसे नारायण का राम अवतार कभी नही होता अगर रावण की मृत्यु राम के हाथों न होनी होती । राम कभी रावण को नही मार पाते अगर विभीषण ने उसका गुप्त भेद राम को बताया न होता । सीता का हरण नही होता अगर सुपर्णखा को अपमानित न किया होता । इन सबके पीछे एक ही बात दिखाई देती है और वह है रावण जो रामायण में वर्णित कहानी का मूल है । यह रावण ही था जिसका वध स्वयं नारायण के अतिरिक्त कोई और कर ही नही सकता था और वही मृत्यु राम के अवतार की आवश्यकता बनी । महऋषि वाल्मीकि की रचना का आधार बनी । पूरी घटना चक्र का केंद्र बनी । यदि रावण के किरदार को रामायण से हटा कर देखे तो रामायण जैसे महाकव्य में पढ़ने ,जानने या फिर सुनने के लिए बचता ही क्या है । एक बात और ध्यान देने योग्य है कि रामायण में रावण का केवल नकारात्मक पक्ष को उजागर किया है । कहते है वह ज्ञानी ,ध्यानी , समझदार , ईश्वर भक्त और ब्रह्मज्ञानी था फिर उस पक्ष को त्रेता युग के महाकव्य में उन पक्षो का वर्णन क्यो नही मिलता...