पुस्तक समीक्षा : माँ एक ग़ज़ल -ए आर आजाद
न माँ : एक ग़ज़ल -एक विहंगम दृष्टि ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ माँ : एक ग़ज़ल श्री ए० आर० आजाद जी द्वारा रचित माँ के प्रति अपनाए गए एक वृहद दृष्टिकोण का जीता जागता दस्तावेज है । माँ की परिभाषा शब्दो मे समाहित नही की जा सकती ।वह एक वृहद आकाश की तरह पूरी कायनात में प्रसारित है । माँ शब्द एक जीवन का आधार , एक शरीर की रचनाकार , समर्पण की अतल गहराई , ममता का महासागर , करुणा की मूर्ति , एक दृढ़ प्रतिज्ञा , परोपकार का साक्षात्कार , धीर वीर गम्भीर गुरु , सहनशीलता की पराकाष्ठा , एक सम्पूर्ण मनोरंजन , अंतिम छोर तक कि सन्तुष्टि , संस्कारों की अधिष्ठात्री व उनका बीजारोपण करनेवाली एक कृषक , सन्तति को सही आकार देने वाली एक कुम्हार और त्याग की साक्षत मूर्ति एक संत है । एक ऐसा शब्द जिसमे पूरा ब्रह्माण्ड समाया है जिसमें पूरी कायनात हँसती है लेकिन दुख एक कोने में छिप कर रोता है । यही वह सपना है ,वह इच्छा है ,वह ऋण है जिसे पूरा करने में माँ अपने जीवन को भी दाँव पर लगा देती है ।...