पुस्तक समीक्षा : माँ एक ग़ज़ल -ए आर आजाद
न माँ : एक ग़ज़ल -एक विहंगम दृष्टि
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
माँ : एक ग़ज़ल श्री ए० आर० आजाद जी द्वारा रचित माँ के प्रति अपनाए गए एक वृहद दृष्टिकोण का जीता जागता दस्तावेज है । माँ की परिभाषा शब्दो मे समाहित नही की जा सकती ।वह एक वृहद आकाश की तरह पूरी कायनात में प्रसारित है । माँ शब्द एक जीवन का आधार , एक शरीर की रचनाकार , समर्पण की अतल गहराई , ममता का महासागर , करुणा की मूर्ति , एक दृढ़ प्रतिज्ञा , परोपकार का साक्षात्कार , धीर वीर गम्भीर गुरु , सहनशीलता की पराकाष्ठा , एक सम्पूर्ण मनोरंजन , अंतिम छोर तक कि सन्तुष्टि , संस्कारों की अधिष्ठात्री व उनका बीजारोपण करनेवाली एक कृषक , सन्तति को सही आकार देने वाली एक कुम्हार और त्याग की साक्षत मूर्ति एक संत है । एक ऐसा शब्द जिसमे पूरा ब्रह्माण्ड समाया है जिसमें पूरी कायनात हँसती है लेकिन दुख एक कोने में छिप कर रोता है । यही वह सपना है ,वह इच्छा है ,वह ऋण है जिसे पूरा करने में माँ अपने जीवन को भी दाँव पर लगा देती है ।
माँ बिना शर्त दूसरों के लिए जीती है । बिना शर्त माँ बनती है ।बिना शर्त सन्तति का लालन पालन करती है । आजीवन उसके लिए अच्छा सोचने को प्रतिबद्ध रहती है । विपरीत परिस्थियों में भी अपने ममत्व को क्रियान्वित कर उसे साकार रखती है । इन्ही सब वैचारिक तथ्यों को ए० आर० आजाद साहब ने अपनी पुस्तक " माँ: एक ग़ज़ल " में एक ही बहर में आदि से अंत तक एक ग़ज़ल के रूप में चित्रित किया है । जिन्हें माँ का प्यार नसीब नही होता उनकी तड़प को आजाद साहब ने ये शब्द दिए --
जिसके हिस्से में इंतजार माँ है
उसकी झोली में स्नेह प्यार माँ है ।।
यद्यपि माँ की कोई कीमत नही होती लेकिन आजाद साहब उसकी भी कीमत कुछ इस अंदाज से आँकते है --
माँ की लगा लो आज इतनी कीमत
ताब दम हौसला का दयार माँ है ।।
आजाद साहब के लिए माँ मुरादों की मजार है । खबरों से भरा एक अखबार है , रहम की मूसलाधार बारिश है , किसी खतरे में खूँखार है , ग़ज़ल की अदब है , नेक सलाहकार है तो जरूरत पड़ने पर एक संहार भी है । अर्थात माँ के उस विराट के रूप को अपनी ग़ज़ल में ढाला है जो जगत का निर्माण करती है ,लालन पालन करती है और संतुलन बनाये रखने के लिये संहार भी करती है । यही तो सृष्टि का नियम है जो जन्म देती है ,फलती फूलती है और छेड़छाड़ करने पर संहारक का दायित्व भी निभा कर सन्तति को उसकी गलती का अहसास भी कराने में पीछे नही रहती । यही तो त्रिदेव -ब्रह्मा, विष्णु ,महेश की प्रतिबद्धता है । माँ का विशद रूप इससे अधिक और क्या हो सकता है ।
इस पुस्तक में ग़ज़लकार आजाद साहब का एक दार्शनिक दृष्टिकोण ,एक गम्भीर विचारक और एक कुशल अभव्यक्तिकार का स्वरूप पाठक के समक्ष उभर कर आया है । इसीलिए वह माँ को अपनी ग़ज़ल में ब्रह्म कर रूप में प्रस्तुत करते है --
सोच करो कभी अपने अंतज में
परम् ज्ञान और उसका सार माँ है ।।
प्रकाशपुंज वही है संसार में
जग और जीवन का आधार माँ है ।।
अपनो पुस्तक में माँ के लिए जिन बिम्बो का प्रयोग किया है वह लेखक की उच्च स्तरीय कल्पनाशीलता का परिचायक है ---
चाँद की तरह अब माँ भी हो गयी है
बादलों में छुप के बेजार माँ है ।।
इस अशआर में माँ के ममत्व की पराकाष्ठा परिलक्षित होती है ।
ग़ज़ल में लेखक अपने यथार्थवादी दृष्टिकोण को यथावत बना कर आगे बढ़ रहा है । माँ के साथ सामाजिक विसंगतियों को भी बड़ी कुशलता से प्रस्तुत किया है जिसमे उनका उपदेशात्मक रूप परिलक्षित होता है ---
हम हुए इतने ज्यादा जो नालायक
रिश्तेदार में कसूरवार माँ है ।।
चलो न कदम बढ़ा कर दोस्त ऐसे
तकती बुढ़ापे में बेजार माँ है ।।
या फिर --
छोड़ने को मज़बूर करने वालो
जरा सुनो औलाद अंसार माँ है ।।
आजाद साहब की यह पुस्तक गंगोजमन सभ्यता का अनूठा दस्तावेज है । जहाँ एक ओर ठेठ उर्दू के शब्दों का प्रयोग आकर्षित करते हैं वहीं हिंदी के शुद्ध शब्द भी हैरान करते हैं । हिंदी के शब्दों के प्रयोग किसी ग़ज़ल का नही वरन एक कविता का भान कराती है ।
हिंदी और उर्दू के मेल से गढ़े गए नए शब्द नए अर्थों में प्रयुक्त किये गए हैं । इस प्रयास में लेखक का बुद्धि वैपर्य दिखाई पड़ता है जो कम से कम मेरे लिए तो नवजात ही है जैसे --गन्धसार , तीक्ष्णसार । मेरे अनुसार ----गन्ध+सार = गंध में समाहित जिसे उन्होंने चन्दन के अर्थ में और तीक्ष्ण + सार = तीक्ष्णता में समाहित जिसे उन्होंने तेजधार या पैनी के अर्थ में प्रयुक्त किया है । कहीं कहीं हिंदी के शुद्ध शब्दो को भी उर्दू शैली में लिखे हैं जैसे -- तुषार को "तौषार " । हो सकता है यह उर्दू ग़ज़ल का अदब हो ।
कुल मिला कर ए० आर० आजाद जी की यह पुस्तक माँ के अदब में एक अमूल्य उपहार साबित होगी और ए० आर० आजाद "माँ : एक ग़ज़ल " के रूप में जाने जाएंगे । मेरी सम्पूर्ण शुभकामनाएं उनके साथ हैं ।
सुशीला जोशी
948/3 योगेन्द्रपुरी ,रामपुरम गेट
मुजफ्फरनगर 251001
Comments
Post a Comment